उलाहना

तेरा उलाहना सच है  रे ,,,,,,,,
मै तुझे याद नहीं करता

(ख़ुद से ख़ुद को कौन याद करता है ? री पगली )

(पर, ये भी सच है - तुझे बहुत मिस करता हूँ - सुमी )

मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------

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