हवा में पुल


तुम्हारी
एक दुनिया है

मेरी
एक दुनिया है

एक दिन

उधर से
तुमने हँसी उछाली

इधर से
मै मुस्कुराया

और...  एक  पुल तामील हो गया
हवा में

और ! हम दोनों दौड़ के
लिपट गए इक दूजे से

और ,,, इस तरह लटकते रहे
हवा के पुल में

ख्वाब के टूटने तक

मुकेश इलाहाबादी ----------

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