मौन समर्पण के कागज़ पे लिखूँगा


मौन समर्पण के कागज़ पे लिखूँगा
इक ख़त  तुम्हारे नाम  से लिखूंगा
सुना! नदी सा कल -कल बहती हो 
तुम्हारे जिस्म पे लहरों से लिखूंगा
मुकेश इलाहाबादी ----------------

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