खिल गया - सूरजमुखी

एक
शहर जो ढंका रहता था
घने कोहरे से
तुम्हारे आने से
छितरा गयी है
सुनहरी धूप
और
खिल गया - सूरजमुखी

मुकेश इलाहाबादी -------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है