लापता हो जाता है

चाँद,
लापता हो जाता है
सूरज कहीं समंदर में डूब जाता है
सितारें अंतरिक्ष की
अतल गहराइयों में खो जाते हैं
मै 'मै ' नहीं रह जाता
'मै' चेतना शून्य हो जाता है
ऐसा तब होता है
जब तुम मुझसे
दूर होती हो
या नाराज़ होती हो
सुन रही हो न ?
मेरी दुनिया
मेरी ब्रह्माण्ड
मेरी सुमी

मुकेश इलाहाबादी ---------

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