थोड़ा बहुत तो धड़कता है
थोड़ा बहुत तो धड़कता है
प्यार करो तो डर लगता है
बैठे रहना गुपचुप गुपचुप
तुझको सोचू मन करता है
चंदा बादल बरखा बिजली
हर मौसम सावन लगता है
दुनिया के सारे सुख फीके
ईश्क़ ही सब कुछ लगता है
मुकेश इलाहाबादी -------
प्यार करो तो डर लगता है
बैठे रहना गुपचुप गुपचुप
तुझको सोचू मन करता है
चंदा बादल बरखा बिजली
हर मौसम सावन लगता है
दुनिया के सारे सुख फीके
ईश्क़ ही सब कुछ लगता है
मुकेश इलाहाबादी -------
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