तनहा रातों में हम आज भी मुस्कुराते है

तनहा रातों में हम आज भी मुस्कुराते है
जब भी तेरी यादों के सितारे जगमगाते हैं
यूँ तो तेरे बगैर जीने का कोई शबब न रहा
मुलाकात की इक उम्मीद में जिए जाते हैं

मुकेश इलाहाबादी ------------------------

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