'रिक्तस्थान-1

देखना
एक दिन 'मै'
घुल जाऊंगा
हवा, पानी, मिट्टी में
मिल जाऊँगा
घुल - घुल कर
आकाश बन जाऊँगा

और फिरलिपट जाऊँगा
तुम्हारे इर्द - गिर्द फैले 'रिक्तस्थान' में

मुकेश इलाहाबादी --------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है