रात चाँद अच्छा नहीं लगता

तेरे जाने के बाद,

रात चाँद अच्छा नहीं लगता
दिन सूरज अच्छा नहीं लता

नींद नहीं अच्छी लगती,मुझे
कोई ख़ाब अच्छा नहीं लगता

महंगाई व मुफिलसी में, घर  
मेहमान अच्छा नहीं लगता

जाड़ा अच्छा नहीं लगता न
सावन अच्छा नहीं लगता

तुम  साथ रहते हो मेरे, तब,,
कोई और अच्छा नहीं लगता

मुकेश इलाहाबादी ---------


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