इक सांस भी ऐसी नहीं जाती,

इक सांस भी ऐसी नहीं जाती,
जब  याद तुम्हारी नहीं आती

बसंत गया,सावन चला गया
मुंडेर पे कोयल भी नहीं आती

मुकेश इलाहाबादी -----------

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एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है