खरीदोगे एक दिन

जैसे
तुम खरीदते हो
बोतलों में बंद पानी
अपनी प्यास के लिए

ऑक्सीजन युक्त मॉस्क
अपने लिये थोड़ी सी
स्वच्छ हवा के लिए

बस
ऐसे ही खरीदोगे एक दिन
अपनी आँखों के लिए दृष्टि
धनकुबेरों से
थोडा सा आस्मान
अपनी थकी और जुड़े हुए
हाथों को फ़ैलाने के लिए

थोड़ी सी आवाज़ अपना मुँह खोलने के लिए
खरीदोगे एक दिन तुम

खरीदोगे
अपने लिए सब कुछ मुट्ठी भर लोगों से

अगर न तानी अपनी मुट्ठियां इन मुट्ठीभर लोगों के ख़िलाफ़

मुकेश इलाहाबादी -----------------------

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