शबोरोज़ मेरे वज़ूद में बहती है

शबोरोज़ मेरे वज़ूद में बहती है
तेरी यादें एक खूबसूरत नदी है

तेरे हिज़्र में वक़्त नहीं कटता,,
तुझ बिन हर लम्हा एक सदी है

मेरे सीने पे अपना सिर रख दे,
फिर सुन,धड़कने क्या कहती हैं

मुकेश तू मेरा हाथ छू कर देख
मेरे बदन में हरारत सी रहती है

मुकेश इलाहाबादी -------------

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