ख्वाबों के शिकारे में बैठ
ख्वाबों
के शिकारे में बैठ
तुम्हारी
आँखों की झील में
तुम्हारी
खिलखिलाहट के चप्पू चलाते हुए
बहुत दूर निकल जाना चाहता हूँ
चाँदनी रातों में
क्यूँ ! सुन रही हो न,
मेरी डल झील सी आँखों वाली दोस्त ?
मुकेश इलाहाबादी -----------------
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