बोल ! उछालूं सिक्का ??

मै हथेली पे सूरज उगाऊँगा
तुम धरती बन के घूमना उसके चारों ओर

मेरे पास इक इश्क़ का सिक्का है
चित गिरा तो 'तू मेरी'
पट गिरा तो ' मै तेरा'
बोल ! उछालूं सिक्का ??

(राज़ की बात तो ये है, सिक्के के दोनों तरफ सिर्फ तेरा नाम
खुदवा के लाया हूँ, हा - हा - हा )


मुकेश इलाहाबादी ----------------------- 

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है