बातों के फूल भी खिलाया करो कभी - कभी

बातों के फूल भी खिलाया करो कभी - कभी
हंसो नहीं तो मुस्कुराया ही करो कभी- कभी

तुम नहीं आते जाते हो कंही कोई बात नहीं
मुझी को अपने घर बुलाया करो कभी-कभी

हर बार हमी अपनी दास्ताने सफर सुनते हैं
तुम भी तो दुःख दर्द बताया करो कभी कभी

औरों के संग तो हमेशा खेलते कूदते रहते हो
चंद लम्हे मेरे संग भी बिताया करो कभी कभी

मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

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