अँधेरी रातों में चाँद सितारा मत ढूंढ

अँधेरी रातों में चाँद सितारा मत ढूंढ
मै  समन्दर हूँ मेरा किनारा मत ढूंढ

मै गया वक़्त हूँ, लौट के न आऊँगा
मुझे बेवज़ह अब तू,दोबारा मत ढूंढ

अन्धो के शहर में चराग़ नहीं होते
फज़ूल  में यंहा  उजियारा मत ढूंढ़ 

बुझ चुके, हैं शोले तन -के - मन के
तू चिंगारी मत ढूंढ अंगारा मत ढूंढ

मुकेश, अपने पैरों पर चलना सीख 
लाठी मत ढूंढ कोई सहारा मत ढूंढ़

मुकेश इलाहाबादी -----------------

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