हर रात तुम्हारे ख्वाब कुछ कह जाते हैं
हर रात तुम्हारे ख्वाब कुछ कह जाते हैं
शुबो मेरे होंठ ग़ज़ल सा गुनगुना लेते हैं
तुम हमसे लब से तो कुछ नही कहते हो
थरथराते हुए लब बहुत कुछ कह देते हैं
यूँ तो आदतन तुम खामोश ही रहती हो
गर हँसती हो तो भौंरे फूल समझ लेते हैं
गर मेरे चले जाने से तुम खुश रहती हो
यकीनन मै चला जाऊँगा, मै कहे देता हूँ
मुकेश इलाहाबादी -------------------------
शुबो मेरे होंठ ग़ज़ल सा गुनगुना लेते हैं
तुम हमसे लब से तो कुछ नही कहते हो
थरथराते हुए लब बहुत कुछ कह देते हैं
यूँ तो आदतन तुम खामोश ही रहती हो
गर हँसती हो तो भौंरे फूल समझ लेते हैं
गर मेरे चले जाने से तुम खुश रहती हो
यकीनन मै चला जाऊँगा, मै कहे देता हूँ
मुकेश इलाहाबादी -------------------------
Comments
Post a Comment