कानो में हौले हौले गुनगुना गया कोई
कानो में हौले हौले गुनगुना गया कोई
दिल उदास था बहुत बहला गया कोई
मै तो अपनी धुन में चला जा रहा था
कनखियों से देख मुस्कुरा गया कोई
कुछ होशियारी कुछ सलीका तो सीखूँ
तमाम दुनियादारी समझा गया कोई
करवटें बदलते बीता करती थी, रातें
आँखों को मीठे ख़ाब दिखा गया कोई
मुकेश ये दिल मेरा वीराने का मंदिर
कल सांझ प्रेम पुष्प चढ़ा गया कोई
मुकेश इलाहाबादी --------------------
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