तुम नदी सा बहती रहोगी

तुम
नदी सा बहती रहोगी
नीचे - नीचे
मै पुल सा तना रहूंगा तुम्हारे ऊपर
न तुम - इतना लबालब हो पाओगी
कि , तुम्हारे लब छू लें मुझे
न मेरे अंदर का लोहा
टूट कर मिलने देगा तुमसे

मुकेश इलाहाबादी -----------

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