परवरदिगार , ने , खुश्बू बनाया

परवरदिगार ,
ने , खुश्बू बनाया
ख़ूबसूरती बनाई
अदाएँ बनाई
औरतें बनाई फिर भी
उसे तसल्ली न हुई
फिर उसने तुम्हे बनाया
सादगी बनाई
तब जा के  उसे तसल्ली हुई
और फिर
बड़ी एहतियात से तुम्हे
ज़मीं पे उतारा
तभी तो, जब तुम चलती हो
सभी दिशाएं गुनगुनाने लगती हैं
हवाएँ महकने लगती है
पंछी चहकने लगते हैं 
तड़ागों में कँवल दल खिलने लगते हैं
प्रेमियों के दिल मचलने लगते हैं

(इसी लिए तुम सबसे जुदा हो
सब से अलग हो - समझी कि नहीं ??
देखो : बस अब तुम नहीं - मुझे झुट्टा कह के भागना नहीं )

मुकेश इलाहाबादी -------

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