जाने क्यूँ ??? --------------

सन्नाटा
होते ही तुम्हारी यादों के मंजीरे
बजने लगते हैं
सुर - लय के साथ
और मै डूब जाता हूँ
एक रूहानी सरगम में

साँझ
होते ही तुम्हारी यादों के फूल
खिलने लगते हैं
जिसकी महक और गमक से
महमहा उठती है - मेरी रात


मुकेश इलाहाबादी ------------

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