एक दिन मैंने सोचा

एक
दिन मैंने सोचा
क्यूँ न एक फेहरिश्त बनाऊँ
कि मुझे कौन कौन अच्छा लगता है ?
तो उस फेहरिश्त में
पहला नाम तुम्हारा था
और
आख़िरी नाम भी तुम्हारा था

सुमी ! सुन रही हो न ????

मुकेश इलाहाबादी -------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है