सुमी, मै जानता हूँ

सुमी,
मै जानता हूँ
तुम्हें बारिश बहुत अच्छी लगती है, लेकिन तुम
बारिश मे भीगना नहीं,
तुम्हें ठंड जल्दी लगती है
बहुत मन होगा तो
बाल्कनी से
बस थोड़ी देर हल्की हल्की फुहार मे भीग लेना
मूसलाधार बारिश में तो
बिल्कुल भी मत निकलना
अगर भीगने का मन ही होगा तो मुझे बता देना
मै तुम्हें अपनी बाहों का रेनकोट पहना दूँगा
फिर तुम बारिश में छत पे
भीगना झम झमाझम
और नाचना
ता था थैया करके
और फिर मै बनाऊँगा
एक गरमा गरम कॉफी तुम्हारे लिए
और मै देखूँगा
बारिश में नहा के
ठिठुरते हुए अपने खूबसूरत चाँद को
मुकेश इलाहाबादी,,,,,,,

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