इंद्रधनुष देखती हुईं फूल सूंघती हुई लड़की

इंद्रधनुष
देखती हुईं
फूल सूंघती हुई लड़की
बहुत प्रसन्न थी
सागर किनारे
तभी लड़के ने कहा
आओ - घरौंदा बनाते हैं
और खेलते हैं
लड़की ने चहक के
फूल फेंक दिया
इंद्रधनुष देखना छोड़
खेलने लगी - बनाने लगी
पूरे मन से घरौंदा
अभी लड़की घरौंदा
बना के सजा ही रही थी
लड़के का जी ऊब गया इस खेल से
उसने एक झटके से
रेत् का घरौंदा तोड़
छलांग लगा दी समंदर में
मछली पकड़ने और
तैरने के खेल के लिए
अब --
लड़की सुबुक रही है
समंदर किनारे
रेत् में लिथड़े फूल
और इंद्रधनुष को याद कर के
अपने टूटे घरौंदे के पास
मुकेश इलाहाबादी ---------

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