यकीनन तुम्हारी आँखों को धोखा हुआ है

यकीनन तुम्हारी आँखों को धोखा हुआ है
वो बाहर से साबुत अंदर से टूटा हुआ है
उसके मिलने का अंदाज़ ही बता रहा था
मिजाज़ उसका कुछ तो बदला हुआ है
उसकी हंसी से मत समझो वो खुश है
बातों से लगा रात भर वो रोया हुआ है
ग़मजदा था बहुत मैखाने गया होगा
मुकेश आज शाम से कुछ बहका हुआ है
मुकेश इलाहाबादी,,,,,

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