रह रह के अपने ज़ख्मों को

रह रह के
अपने ज़ख्मों को
कुरेदता रहता हूँ
मै ज़िंदा हूँ भी
इस बात की
तस्दीक करता रहता हूँ
मुकेश इलाहाबादी

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