और मौन डरने लगता है

 शोर बढ़ता जाता है

और मौन डरने लगता है

मगर मौन के भीतर ही
अक्सर वे कहानियाँ रहती हैं
जिन्हें सुना नहीं जाता

क्योंकि सुनने के लिए
सहमति नहीं
धैर्य चाहिए होता है

मुकेश ,,,,,,,,,,

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