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Sunday, 31 August 2014

किसी को मै कह सकूँ अपना कोई ऐसा न मिला

किसी को मै कह सकूँ अपना कोई ऐसा न मिला
आखों को सफर में कोई मंज़र सुहाना न मिला
ख्वाहिश थी कोई तो मुझको भी टूट कर चाहे तो
उम्र बीत गयी मगर कोई ऐसा दीवाना न मिला
अपने ख्वाबों के गिर्दाब में डूबता- उतराता हूँ
बहुत कोशिशों के बाद भी कोई किनारा न मिला
तुझसे मुलाक़ात के बाद एक उम्मीद जगी थी
लेकिन तुमसे भी हमको कोई सहारा न मिला
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------

कोई झील नहीं, कुंआ नहीं, दरिया नहीं

कोई झील नहीं, कुंआ नहीं, दरिया नहीं
मेरी प्यास बुझे ऐसा कोई ज़रिया नहीं
मुकेश इलाहाबादी ------------------------

लोग बैठे हैं घरों में अपने अपने

लोग बैठे हैं घरों में अपने अपने सूरज उगा के
हम भी बैठे हैं अँधेरे में ख़्वाबों का चाँद उगा के
मुकेश इलाहाबादी --------------------------
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मुहब्बत की नई परिभाषा बना लो

मुहब्बत की नई परिभाषा बना लो
आओ ज़रा हमसे मेल जोल बढ़ा लो

मेरी ग़ज़ल सुनो सुन के मुस्कुरा दो
अपनी हंसी कुछ और हसीं बना लो

तुम्हारे चेहरे पे नमकीन कशिश है
थोड़ा प्यार की सोंधी खुशबू बसा लो

फलक से तोड़ के लाया हूँ मै ये जो
इन सितारों को आँचल में सजा लो

ख़ाके सुपुर्द हो के फूल सा खिल गया
इस फूल को अपने गज़रे में लगा लो

मुकेश इलाहाबादी -------------------

Saturday, 30 August 2014

कब तक मेरे कूचे से खामोशी से

कब तक मेरे कूचे से खामोशी से गुज़रते रहोगे,मुकेश
देखना एक रोज़ तेरी धड़कने खुद ब खुद आवाज़ देंगी
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------------

अपने चाहने वालों की फेहरिस्त में

अपने चाहने वालों की फेहरिस्त में हमारा नाम भी रख लो
मुकेश उम्र के न जाने किस मुकाम पे हमारी ज़रुरत पड़
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------
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चलो अच्छा हुआ दर्दे दिल का बहना हुआ

चलो अच्छा हुआ दर्दे दिल का बहना हुआ
इसी बहाने तुमने हमारा हाल तो पूछा !
मुकेश इलाहाबादी --------------------------