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Tuesday, 24 February 2026

मैं, तन्हाई और तारे

 मैं, तन्हाई और तारे


मैं बैठा हूँ रात की खामोशी में,

जहाँ तन्हाई मेरे चारों ओर बिखरी है।

तारों की रोशनी छुपती है बादलों में,

और मैं उनके बीच तेरी याद खोजता हूँ।


तन्हाई मेरी सहेली बन गई है,

हर साँस में तेरे बिना की दूरी का अहसास लाती है।

मैं अपने हाथ फैलाता हूँ,

जैसे तारों को छू सकूँ,

और उन्हें अपने दिल के करीब ला सकूँ।


हर तारा एक ख्वाब है,

जो मैंने तेरे लिए सजाया था।

अब वे ख्वाब अकेले चमकते हैं,

और मैं,

उन्हें देखकर मुस्कुराता हूँ और रोता हूँ

एक ही समय में,

तेरे बिना भी, तेरे साथ भी।


तन्हाई और तारे मेरे गीत गाते हैं,

सन्नाटे में उनका संगीत बसा है।

मैं सुनता हूँ,

और खुद को पाता हूँ उस जगह पर,

जहाँ सिर्फ हमारी यादें रहती हैं,

और सिर्फ हमारा प्यार फुसफुसाता है।


मैं, तन्हाई और तारे 

तीनों एक ही रूहानी दुनिया में मिल जाते हैं,

जहाँ रात भी हमारी हँसी सुनती है,

और चाँद हमारी खामोशी को प्यार करता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,

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