लड़कियाँ मोहब्बत में कहाँ-कहाँ खुद को छोड़ देती हैं…
लड़कियाँ
मोहब्बत में
अपने तकिए के नीचे से वो डायरी हटा देती हैं
जिसमें उन्होंने एक बार
तुमसे जुड़ी सारी उम्मीदें लिखी थीं।
वो अपने पसंद के इत्र का इस्तेमाल
कम कर देती हैं —
क्योंकि तुम्हें "ज़्यादा महक" से एलर्जी है।
लड़कियाँ
मोहब्बत में
अपना मनपसंद रंग पहनना छोड़ देती हैं,
जो कभी तुमने हँसते हुए कहा था —
"ये रंग तुम पर कम फबता है।"
वो अपने दोस्तों से मिलने के वक़्त को
तुम्हारी कॉल के हिसाब से ढाल लेती हैं,
और कभी-कभी
तुम्हारी झुंझलाहट के लिए
अपनी हँसी को गिरवी रख देती हैं।
लड़कियाँ
मोहब्बत में
हर उस बात को माफ़ कर देती हैं
जो उनके अंदर एक गांठ बना देती है
बस इसलिए कि
तुम्हारा हाथ छूट न जाए।
वो तुम्हारी हर चुप्पी को
एक नई भाषा समझने लगती हैं,
और तुम्हारी हर दूरी को
"थोड़ी देर की बात" मान लेती हैं।
लड़कियाँ
मोहब्बत में
खुद से कम, तुमसे ज़्यादा बात करती हैं
अपनी पसंद को तुम्हारी आदत बना लेती हैं,
और तुम्हारी आदत को
अपना धर्म।
वो जब थक जाती हैं
तो भी नहीं कहतीं
क्योंकि उन्हें लगता है
मोहब्बत में सह लेना ही सबूत होता है।
लड़कियाँ
मोहब्बत में
कहीं रास्तों में नहीं,
बल्कि खुद के भीतर खो जाती हैं
ताकि तुम्हें कभी
तन्हाई का सामना न करना पड़े।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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