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Saturday, 28 February 2026

नीले की तहों में

 नीले की तहों में


तुम्हारी आँखों में

नीले आसमान की तहें हैं

जैसे किसी अनंत चादर को

सावधानी से मोड़ कर रख दिया गया हो।


उन तहों के बीच

उड़ते हैं अधूरे पंछी,

जो दिशा नहीं,

बस विस्तार खोजते हैं।


कभी-कभी

एक बादल ठहर जाता है वहाँ

थोड़ी-सी नमी छोड़कर,

थोड़ी-सी उदासी।


मैं जब झाँकता हूँ,

तो दिखता है

एक पूरा मौसम पलकों के भीतर

धूप का धीमा कंपन,

हवा का अदृश्य स्पर्श।


तुम्हारी आँखें

सिर्फ़ रंग नहीं हैं,

वे आकाश का वह हिस्सा हैं

जहाँ क्षितिज

अपने ही भीतर मुड़ जाता है।

और मैं

हर बार लौटकर

उसी नीले में खो जाना चाहता हूँ।


मुकेश ,,,,,,,,

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