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Tuesday, 24 February 2026

मैं, एहसास और पुरानी गलियाँ

 मैं, एहसास और पुरानी गलियाँ


मैं चलता हूँ उन गलियों में,

जहाँ हमारी हँसी अभी भी हवा में गूँजती है।

पुरानी ईंटें, टूटी दीवारें,

हर मोड़ एक याद बनकर खड़ी है।

और मैं… मैं अपने एहसासों के साथ

उन स्मृतियों को सहलाता हूँ।


हर मोड़ पर तेरी परछाई मिलती है,

हर खिड़की में तेरी मुस्कान झलकती है।

मैं अपने कदमों की खामोशी सुनता हूँ,

और महसूस करता हूँ —

तुम हमेशा मेरे साथ थी,

और अब भी हो,

सिर्फ एहसासों के रूप में।


पुरानी गलियाँ मुझे हमारी कहानियाँ सुनाती हैं,

अनकहे शब्दों, अधूरी बातों और चुप्पियों के गीत।

मैं उन गीतों को अपने दिल में सजाता हूँ,

और हर साँस में तुम्हें महसूस करता हूँ।


मैं, एहसास और पुरानी गलियाँ 

तीनों मिलकर एक रूहानी संगीत बनाते हैं,

जहाँ सिर्फ यादें नहीं,

प्यार का हर एहसास जीवित है।


और जब रात आती है,

मैं उन गलियों में खड़ा रह जाता हूँ,

चाँदनी में तेरी मुस्कान तलाशते हुए,

यह जानते हुए कि

पुरानी गलियाँ भी हमें फिर से जोड़ सकती हैं,

सिर्फ एहसासों के जरिये।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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