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Sunday, 22 February 2026

ये आख़िरी वाला मेरी तरह टूटा था...

 ये आख़िरी वाला मेरी तरह टूटा था..."


और मैं

कुछ कहे बिना

उसी टूटी हुई रेखा में

उसका नाम पढ़ता

वो

हवा में

शून्य में

या मेरी किसी भूली-बिसरी नज़्म में

विलीन हो जाती

और मैं...

बस राख झाड़ता रहता

अपनी उँगलियों से

या शायद यादों से।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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