मैं, तेरा नाम और चाँदनी
मैं बैठा हूँ चुपचाप
उस बेंच पर, जहाँ चाँदनी जमीन को छू रही है।
हवा में तेरे नाम की खुशबू है,
और हर झोंके में तेरी हँसी गूँजती है।
चाँदनी जैसे किसी जादूगर की रौशनी,
तेरे चेहरे को मेरे ख्वाबों में सजाती है।
मैं अपने दिल की हर धड़कन में
तेरा नाम लिखता हूँ,
और हर बार उसे फुसफुसाता हूँ
जैसे कोई सागर अपनी लहरों से तट को पुकारे।
तेरे बिना ये रात अधूरी है,
लेकिन तेरे नाम से जगमगाती है।
चाँदनी मेरी खामोशी को सुनती है,
और मेरे अकेलेपन को सजाती है
सपनों के मोती से।
मैंने तेरा नाम पंखों पर लिखा है,
हवा उसे कहीं दूर तक ले जा रही है।
हर सितारा मेरे ख्यालों में झिलमिलाता है,
और मैं मुस्कुराता हूँ
क्योंकि तेरी यादें
चाँदनी से भी ज्यादा नर्म और उजली हैं।
और जब चाँदनी धीरे-धीरे खत्म होती है,
मैं अपने आप को
तेरे नाम में खो देता हूँ।
मैं, तेरा नाम और चाँदनी
तीनों एक ही रूहानी संगीत में मिल जाते हैं,
जहाँ बस प्यार और शांति का बसेरा होता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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