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Saturday, 7 March 2026

समय और चेतना का रहस्य

 समय और चेतना का रहस्य

समय

किसी नदी की तरह बहता है,

पर उसका स्रोत

किसी पर्वत में नहीं मिलता।


हम उसे

घड़ी की सुइयों में खोजते हैं,

कैलेंडर के पन्नों में बाँधते हैं,

पर वह हर बार

हमारी पकड़ से

थोड़ा आगे निकल जाता है।


और चेतना

वह वह आकाश है

जिसमें समय की सारी नदियाँ

बहती रहती हैं।


ऋषियों ने कहा था—

समय घटना है,

चेतना साक्षी।


समय बदलता है,

चेतना देखती है।


एक जन्म से मृत्यु तक

मनुष्य समय की सीढ़ियाँ चढ़ता है,

पर भीतर कहीं

एक ऐसी जगह भी है

जहाँ कोई सीढ़ी नहीं होती।


वहाँ

न अतीत है

न भविष्य—

केवल एक स्थिर

अनन्त वर्तमान।


विज्ञान ने बताया

कि समय सापेक्ष है,

गति से धीमा या तेज़ हो सकता है।


पर ध्यान ने बताया

कि चेतना में उतरते ही

समय की गति

लगभग मौन हो जाती है।


तभी समझ आता है

समय

ब्रह्मांड की कहानी है,


और चेतना

उस कहानी को पढ़ने वाली

अनंत दृष्टि।


जब मनुष्य

केवल समय में जीता है

तो वह बूढ़ा होता है,


और जब चेतना में उतरता है

तो उसे पहली बार पता चलता है


कि असली रहस्य

समय का नहीं,

उसे देखने वाली

चेतना का है।


क्योंकि

समय समाप्त हो सकता है,

पर चेतना

कभी समाप्त नहीं होती।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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