“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
हर खुशी बहुत शोर नहीं करती,
कुछ ख़ामोशी में खिल जाती है।
दिल अगर सच्चा हो अपना,
दुनिया खुद ही मिल जाती है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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