एक रास्ता जो भीतर जाता है
दुनिया में
अनगिनत रास्ते हैं
कुछ शहरों की ओर जाते हैं,
कुछ मंज़िलों की ओर,
और कुछ
सपनों की ओर।
लोग
उन पर चलते हैं
जल्दी-जल्दी,
मानो हर मोड़ पर
कोई नया उत्तर
उनका इंतज़ार कर रहा हो।
पर एक रास्ता ऐसा भी है
जो बाहर नहीं,
भीतर की ओर जाता है।
वह न नक्शों में मिलता है,
न किसी मील के पत्थर पर
उसका नाम लिखा होता है।
उस रास्ते पर
चलने के लिए
कदम नहीं,
साहस चाहिए
क्योंकि वहाँ
भीड़ नहीं होती,
सिर्फ़
अपने ही विचारों की
लंबी खामोशी होती है।
जो आदमी
एक बार
उस रास्ते पर चल पड़ता है,
वह धीरे-धीरे समझता है
कि सबसे लंबी यात्राएँ
दुनिया में नहीं,
मनुष्य के भीतर होती हैं।
और उस रास्ते की मंज़िल
किसी शहर का नाम नहीं,
वह बस
एक शांत पहचान है
जहाँ पहुँचकर
आदमी पहली बार
खुद को
सचमुच जान पाता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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