“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
दिल को इतना भी उदास मत किया कर,
थोड़ी धूप भी पास रखा कर।
अगर दुनिया समझ न पाए तुझे, तू ख़ुद को तो समझा कर।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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