ख़ूबसूरती का शांत रहस्य
वो जब पास बैठती है
तो कोई शोर नहीं होता,
न हवा बदलती है
न मौसम।
पर दिल को
अजीब-सी ख़बर मिलने लगती है
कि दुनिया में
कोई बहुत कोमल चीज़
अभी-अभी पास आकर बैठी है।
वो बहुत ख़ूबसूरत नहीं—
कम से कम
दुनिया की आँखों के हिसाब से।
पर उसकी आँखों में
एक धीमा-सा उजाला है,
जैसे चाँद
पानी में उतर कर
खुद से ही बातें कर रहा हो।
उसकी मुस्कान
किसी बड़े ऐलान की तरह नहीं,
बस
होंठों के कोनों पर
एक हल्की-सी रौशनी
जिसे देखकर
दिल को
बिना वजह
यक़ीन हो जाता है
कि जीवन
इतना भी कठिन नहीं।
कभी-कभी
जब वो कुछ नहीं कहती
और बस
अपनी उँगलियों से
हवा में कोई अदृश्य रेखा बनाती है,
तो लगता है
जैसे प्रेम
शब्दों से नहीं
खामोशियों से लिखा जा रहा हो।
वो औरत
किसी फूल की तरह नहीं
जिसकी ख़ुशबू
दूर तक जाती हो।
वो तो
उस रात की तरह है
जिसमें चाँद कम हो
पर आकाश गहरा हो
और उसी गहराई में
ख़ूबसूरती का
एक शांत रहस्य
धीरे-धीरे
दिल पर उतरता चला जाए।
मुकेश ,,,,,,,
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