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Wednesday, 11 March 2026

उस क्षण का इंतज़ार

 उस क्षण का इंतज़ार


जीवन में

कभी-कभी

हम किसी व्यक्ति का नहीं,

किसी क्षण का इंतज़ार करते हैं।


वह क्षण

जो अचानक आएगा

और सब कुछ

थोड़ा-सा बदल देगा

जैसे लंबे अँधेरे के बाद

खिड़की से आती

पहली धूप।


हम चलते रहते हैं

दिनों और वर्षों के बीच,

कामों की भीड़ में,

रिश्तों की उलझनों में।


पर भीतर कहीं

एक शांत जगह होती है

जहाँ समय

धीरे-धीरे बैठा रहता है,

मानो किसी संकेत का

इंतज़ार कर रहा हो।


वह क्षण

किसी तारीख़ में नहीं लिखा होता,

न किसी घड़ी में

उसका समय तय होता है।


वह बस

तभी आता है

जब मन

अपनी भटकन से लौटकर

थोड़ा-सा स्थिर हो जाता है।


और जब वह क्षण आता है

तो समझ में आता है

कि हम

किसी बदलाव का नहीं,

दरअसल

अपने ही भीतर

एक नई समझ के जन्म का

इंतज़ार कर रहे थे।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,,

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