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Wednesday, 4 March 2026

पत्थर और पीठ

 पत्थर और पीठ


पत्थर सबको मिले थे

बचपन से ही


कुछ ने

उन्हें खेल समझकर फेंका

कुछ ने

तुलना में तोला

कुछ ने

उन्हें अपने घर की नींव में छुपा दिया


पर

पीठ

सबको नहीं मिली


पीठ चाहिए होती है

वज़न के लिए

और वज़न

हर किसी को मंज़ूर नहीं


भीड़ के हाथ में

हमेशा पत्थर रहे

और वे

किसी न किसी पीठ की तलाश में रहे


फेंकना

उन्हें आता था

सहन करना

किसी और का काम था


जिन्हें पीठ मिली

वे

आवाज़ नहीं करते थे

बस

थोड़ा और झुक जाते थे


इतिहास

हमेशा पत्थर फेंकने वालों ने लिखा

पर

वक़्त

पीठ वालों के साथ खड़ा रहा


क्योंकि

पत्थर

एक दिन

घिस जाते हैं


पीठ

अगर टूटे नहीं

तो

पहाड़ बन जाती है


और पहाड़

पत्थर नहीं फेंकते

बस

खड़े रहते हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,

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