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Sunday, 26 April 2026

रौशनी की बात छोड़, पहले प्यास तो बुझा,

 रौशनी की बात छोड़, पहले प्यास तो बुझा,

ज़िंदा रहने के लिए, ये अहसास तो बचा।


दिल के सूखे कुएँ में, उतर के देख तू,

शायद कुछ भीग जाए, ये विश्वास तो बचा।


वक़्त की धूप ने, जला दी हरियाली,

छाँव की याद ही सही, कोई आस तो बचा।


भीड़ में खो गया हूँ, अपने ही शहर में,

नाम पुकार ले मेरा, ये एहसास तो बचा।


सच की राह पे चल, चाहे काँटे ही मिलें,

झूठ के साये से दूर, ये उजास तो बचा।


रिश्ते बिखर गए हैं, धूल की तरह यहाँ,

एक सच्चा सा लम्हा, कहीं पास तो बचा।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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