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Thursday, 4 June 2026

अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ

 अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ

तो लगता है

मैं प्रकाश की तलाश में नहीं था

मैं तो केवल

अपने भीतर के उस व्यक्ति को खोज रहा था

जो हर रोशनी के बाद भी

अधूरा रह जाता था

और हर अँधेरे के बाद भी

पूरी तरह समाप्त नहीं होता था।

शायद वही मैं था

और शायद वही

मेरे सारे शब्दों से परे था।

मुकेश ,,,,,,,,,,

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