गोलगप्पे खाती लड़कियां
गोलगप्पे खाती लड़कियां,
हँसी उनके होंठों पर,
तीखी चटनी उनके जज़्बात में,
और हर बूँद पानी में
छुपा एक छोटा सा जादू।
“थोड़ा और डालो!”
कहकर वो छेड़ती हैं,
हम देखते हैं, मुस्कुराते हैं,
और खुद को रोक नहीं पाते।
मुंह में पानी, आँखों में चमक,
हर गोलगप्पा जैसे
एक नई कहानी कहता है।
उनकी नज़रें नटखट,
उनकी बातें चुटीली,
और हर चबाने के साथ
दिल की धड़कन भी तेज़ हो जाती है।
गोलगप्पे खाती लड़कियां,
एक पल में खुशियाँ बाँट देती हैं,
मसालेदार, मीठी, और पूरी तरह ज़िन्दा।
और जब वो आगे बढ़ती हैं,
तो लगता है
दुनिया थोड़ी हल्की,
थोड़ी रंगीन,
और बिल्कुल प्यारी हो गई।
मुकेश ,,,,,,,
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