मैं, धड़कन और रात का संगीत
मैं बैठा हूँ चुपचाप,
रात की खामोशी में डूबा हुआ।
मेरी धड़कनें मेरे भीतर संगीत बजाती हैं,
और हर धड़कन में तेरे नाम की गूँज है।
रात की हवा धीरे-धीरे छूती है मेरी त्वचा को,
जैसे तुम्हारी हल्की छुअन हो।
सन्नाटा भी अब एक सुर बन गया है,
तेरी यादों से गूंजते हुए,
हर पल मेरे दिल में एक राग रचता है।
मैंने अपनी आँखों में तेरे ख्वाब सजाए हैं,
हर मुस्कान, हर आहट, हर चुप्पी
मेरे दिल की लय में धड़कती है।
रात का संगीत, मेरी धड़कन और मैं—
तीनों मिलकर
तेरे बिना भी तेरी मौजूदगी का एहसास देते हैं।
मैं सुनता हूँ बारिश की बूँदों की सिम्फनी,
पत्तों की सरसराहट की मिठास,
और अपने भीतर के संगीत को महसूस करता हूँ,
जो सिर्फ तुम्हारे होने से जीवित है।
मैं, धड़कन और रात का संगीत
तीनों मिलकर मेरे अकेलेपन को सजाते हैं,
और मुझे यह सिखाते हैं कि
प्यार सिर्फ बोलने का नहीं,
महसूस करने और जीने का नाम है।
मुकेश ,,,,,,,,,
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