“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मेरी धड़कनों में छुपा है तुम्हारा असर,
हर ख़ामोशी में सुनता हूँ तुम्हारी ही ख़बर,
मैं ख़ुद से भी कम मिलता हूँ इन दिनों,
तुम मुझसे यूँ ही बेख़बर मत रहना मगर।
मुकेश ,,,,,,,,,
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