उजली सादगी
किस लोक से लाई हो
ये उजली सादगी?
ना इसमें दुनिया की चालाकी है,
ना चाहत का शोर—
लगता है
किसी ऐसी जगह से आई हो
जहाँ लोग
दिल छुपाना नहीं,
दिल होना सीखते हैं।
शायद
उस लोक में
इश्क़ माँग नहीं होता,
और सादगी
कोई हुनर नहीं—
बस इंसान होने का
सबसे साफ़ तरीक़ा होता है।
मुकेश्,,,
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