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Sunday, 1 March 2026

उजली सादगी

 उजली सादगी

किस लोक से लाई हो

ये उजली सादगी?

ना इसमें दुनिया की चालाकी है,

ना चाहत का शोर—

लगता है

किसी ऐसी जगह से आई हो

जहाँ लोग

दिल छुपाना नहीं,

दिल होना सीखते हैं।

शायद

उस लोक में

इश्क़ माँग नहीं होता,

और सादगी

कोई हुनर नहीं—

बस इंसान होने का

सबसे साफ़ तरीक़ा होता है।

मुकेश्,,,

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