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Thursday, 5 March 2026

बीज धरती की यात्राएँ हैं,

 बीज

धरती की यात्राएँ हैं,

और हवाएँ भी।


यात्रा पर तो वह रोशनी भी है

जो पत्तों तक नहीं पहुँच पाती,

जो चुपचाप

मिट्टी की तहों में उतर जाती है।


वह रोशनी

जो अँधेरे के भीतर

एक लंबी, धीमी साधना में है

भाग्य में जिसके

किसी सुबह

अंकुर बनकर

पहचाने जाने का इंतज़ार लिखा है।


और हम

हम भी शायद

उसी बीज की तरह हैं,

अपने-अपने भीतर

एक हरियाली की

गुप्त यात्रा लिए हुए।


मुकेश ,,,

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