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Saturday, 21 March 2026

इत्र-सी बिखरी हुई तुम्हारी यादों का मौसम

 


इत्र-सी बिखरी हुई तुम्हारी यादों का मौसम


इत्र-सी बिखरी हुई

तुम्हारी यादों का मौसम है,


हर साँस में

तेरा ही कोई अहसास ठहरा है।


हवा जब भी चलती है

तेरी ख़ुशबू

दिल के दर खोल जाती है,


और मैं…

बेख़ुद-सा होकर

उसी महक में खो जाता हूँ।


ना तुम हो,

ना तुम्हारी आहट—

फिर भी हर तरफ़

तुम्हारी मौजूदगी का आलम है।


शायद…

यादें भी इत्र की तरह होती हैं

एक बार लग जाएँ

तो उम्र भर साथ रहती हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,

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