होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Wednesday, 11 March 2026

किताबें : एक प्रयोगात्मक शोध-नज़्म

 किताबें : एक प्रयोगात्मक शोध-नज़्म


(१) परिकल्पना

मान लिया जाए —

मनुष्य एक प्रश्न है

और किताबें

उस प्रश्न पर रखी हुई

समय की उंगलियाँ।


जब भी कोई पन्ना खुलता है

एक सभ्यता

धीरे से सांस लेती है।


(२) प्रयोग

मैंने एक किताब खोली

और देखा—


उसमें

स्याही से ज़्यादा

अनुभव था


अक्षरों से ज़्यादा

यात्राएँ थीं


और पन्नों से ज़्यादा

मनुष्य का संघर्ष।


किताबें

दरअसल

विचारों की प्रयोगशाला हैं

जहाँ

हर पाठक

एक नया वैज्ञानिक बन जाता है।


(३) परिणाम

जब मनुष्य

किताबों से दूर जाता है

तो उसके प्रश्न

छोटे हो जाते हैं।


और जब वह

किताबों के पास बैठता है

तो

उसकी आँखों में

सभ्यताओं के नक्शे उगने लगते हैं।


(४) उपयोगिता


किताबें

रोटी नहीं बनातीं

पर भूख को समझना सिखाती हैं।


किताबें

घर नहीं बनातीं

पर मनुष्य को

घर बनाने का सपना देती हैं।


किताबें

युद्ध नहीं रोकतीं

पर

मनुष्य के भीतर

शांति का बीज बो देती हैं।


(५) निष्कर्ष


किताबें

दरअसल

समय का सबसे शांत आविष्कार हैं।


वे

न बोलती हैं

न चलती हैं

न लड़ती हैं


फिर भी

धीरे-धीरे

दुनिया बदल देती हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment